INSAT-3DS: मौसम के हर बदलाव की अंतरिक्ष से निगरानी होगी, इनसेट-3डीएस की लॉन्चिंग अगले माह

Jan 16, 2024 - 12:44
Jan 16, 2024 - 12:51
INSAT-3DS: मौसम के हर बदलाव की अंतरिक्ष से निगरानी होगी, इनसेट-3डीएस की लॉन्चिंग अगले माह
नई उड़ान: इसरो-आइएमडी के संयुक्त मिशन की तैयारी में जुटे वैज्ञानिक

बेंगलूरु. INSAT-3DS एक्सपोसैट सैटेलाइट की लॉन्चिंग से नए साल की शुरुआत करने के बाद इसरो अब बदलते मौसम पर नजर रखने के लिए (INSAT-3DS) इनसेट-3डीएस सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजने की तैयारी में जुटा है। इसरो के वैज्ञानिकों ने बताया कि यह उपग्रह सबसे एडवांस रॉकेट ‘जियोसिंक्रोनस लॉन्च व्हीकल’ (जीएसएलवी-एफ 14) के जरिए फरवरी के पहले हफ्ते में लॉन्च किया जाएगा।

इनसेट-3डीएस इसरो और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आइएमडी) का संयुक्त मिशन है। देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम बदलता रहता है। कहीं बारिश होती है तो कहीं मौसम सूखा रहता है।

बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में कई बार चक्रवाती तूफान आते हैं। जलवायु परिवर्तन की समस्या से भारत भी जूझ रहा है। ऐसे में अंतरिक्ष में सैटेलाइट के जरिए मौसम के छोटे से छोटे बदलाव पर नजर रखी जा सकती है। इनसेट-3डीएस अंतरिक्ष में क्लाइमेट ऑब्जर्वेटरी के रूप में काम करेगा।

दो उपग्रह पहले से कर रहे हैं काम

जलवायु परिवर्तन पर नजर रखने के लिए इसरो के दो उपग्रह इनसेट 3डी व इनसेट 3डीआर पहले से अंतरिक्ष में हैं। पहले इनसेट-3डीएस को इसी माह लॉन्च किया जाना था, फिलहाल इसे लॉन्च व्हीकल से जोड़ने का काम चल रहा है। अब इसे फरवरी के पहले हफ्ते में लॉन्च किया जाएगा।

जीएसएलवी भेजेगा

करीब आठ माह में जीएसएलवी से यह पहली लॉन्चिंग होगी। यह रॉकेट तीनों स्टेज के लिए ‘क्रायोजेनिक लिक्विड प्रोपेलेंट्स’ का इस्तेमाल करता है। लिक्विड ईंधन का इस्तेमाल जटिल होता है, लेकिन ज्यादा लिफ्ट-ऑफ की ताकत देता है। भारत का दूसरा रॉकेट पीएसएलवी है, जिसमें ठोस ईंधन का इस्तेमाल किया जाता है।