Promises of Employment : रोजगार देने के वादे समय पर पूरे करने का भी रहे ध्यान

Sep 29, 2023 - 16:25
Promises of Employment : रोजगार देने के वादे समय पर पूरे करने का भी रहे ध्यान
Promises of Employment : रोजगार देने के वादे समय पर पूरे करने का भी रहे ध्यान
राजनीतिक दलों को घोषणा करने के साथ यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि वे रोजगार कैसे देंगे और कब तक देंगे बेरोजगारी लाइलाज बीमारी होती जा रही है। हर बार चुनाव होते हैं और राजनीतिक पार्टियां युवाओं को भरपूर रोजगार देने का वादा करती हैं। मगर जैसे ही सत्ता मिलती है, सरकारें वादों को भूल जाती हैं और रोजगार का इंतजार कर रहा युवा खुद को ठगा सा महसूस करता है। वर्तमान गहलोत सरकार का भी कार्यकाल पूरा होने को है, लेकिन अब भी एक लाख से ज्यादा भर्तियां अटकी हुई हैं। हालत यह है कि प्रदेश में पंजीकृत बेरोजगारों की संख्या 18.40 लाख से ज्यादा है। यदि इसमें अपंजीकृत बेरोजगारों को भी जोड़ लें, तो यह आंकड़ा बढ़ जाएगा।

नौकरियां आज भी युवाओं की पहली पसंद हैं।

चुनाव से पूर्व जारी कांग्रेस के घोषणा पत्र में युवाओं को भरपूर रोजगार देने का वादा किया गया था। मगर उतनी संख्या में रोजगार नहीं मिल पाए, जितनी आस युवा लगाकर बैठे थे। सरकारी नौकरियां आज भी युवाओं की पहली पसंद हैं। इसका अंदाजा सरकारी नौकरियों के लिए होने वाली परीक्षाओं में युवा वर्ग की उमड़ने वाली भीड़ है। निजी क्षेत्र में नौकरी की अनिश्चितता और अपेक्षाकृत कम वेतन के चलते युवाओं का सरकारी नौकरी की तरफ रुझान स्वाभाविक भी है। लेकिन निजी क्षेत्र में भी रोजगार के पर्याप्त अवसर नजर नहीं आते। सरकार ने इस साल 21 रोजगार मेले लगाए, जिनमें पांच लाख से ज्यादा ने युवाओं ने पंजीकरण कराया। इनमें से 1.77 लाख युवा निजी कंपनियों में साक्षात्कार देने पहुंचे, लेकिन केवल 65 हजार को ही नौकरी के लिए बुलाया गया।

राज्य में पेपर लीक की घटनाओं ने भी युवाओं को निराश किया है। रीट पेपर सहित कई परीक्षाओं के पेपर लीक होने की वजह से युवा परेशान हैं। हालांकि सरकार ने पेपर लीक को लेकर कानून भी बनाया है, जिसमें उम्रकैद का भी प्रावधान किया गया है। लेकिन, अब तक जो पेपर लीक हो चुके है, उन भर्ती परीक्षाओं में हो रही देरी के कारण युवा हताश और निराश हैं। राज्य सरकार ने बेरोजगारी भत्ते का प्रावधान कर रखा है, लेकिन यह भी बहुत कम बेरोजगारों को मिल पाया है।

चुनाव की तैयारियां

अब फिर चुनाव की तैयारियां चल रही हैं। थोड़े दिनों बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल अपने-अपने घोषणा पत्र भी जारी करेंगे। तय है कि इन घोषणा पत्रों में लाखों युवाओं को रोजगार देने का वादा किया जाएगा। राजनीतिक दलों को रोजगार देने की घोषणाएं करने के साथ यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि वे रोजगार कैसे देंगे और कब तक देंगे। - उमेश शर्मा